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Friday, 2 March 2012

सफ़ेद बौना तारा या व्हाइट ड्वार्फ़ स्टार



तुलनात्मक तस्वीर: हमारा सूरज (दाएँ तरफ़) और पर्णिन अश्व तारामंडल में स्थित द्वितारा "आई॰के॰ पॅगासाई" के दो तारे - "आई॰के॰ पॅगासाई ए" (बाएँ तरफ़) और सफ़ेद बौना "आई॰के॰ पॅगासाई बी" (नीचे का छोटा-सा बिंदु)। इस सफ़ेद बौने का सतही तापमान ३,५०० कैल्विन है।
खगोलशास्त्र में सफ़ेद बौना या व्हाइट ड्वार्फ़ एक छोटे तारे को बोला जाता है जो "अपकृष्ट विद्युदणु पदार्थ" का बना हो। "अपकृष्ट विद्युदणु पदार्थ" या "ऍलॅक्ट्रॉन डिजॅनरेट मैटर" में विद्युदणु(ऍलॅक्ट्रॉन) अपने परमाणुओं से अलग होकर एक गैस की तरह फैल जाते हैं और नाभिक (न्युक्लिअस, परमाणुओं के घना केंद्रीय हिस्से) उसमें तैरते हैं। सफ़ेद बौने बहुत घने होते हैं - वे पृथ्वी के जितने छोटे आकार में सूरज के जितना द्रव्यमान (मास) रख सकते हैं।
माना जाता है के जिन तारों में इतना द्रव्यमान नहीं होता के वे आगे चलकर अपना इंधन ख़त्म हो जाने पर न्यूट्रॉन तारा बन सकें, वे सारे सफ़ेद बौने बन जाते हैं। इस नज़रिए से क्षीरमार्ग (हमारीआकाशगंगा) के ९७% तारों के भाग्य में सफ़ेद बौना बन जाना ही लिखा है। सफ़ेद बौनों की रौशनी बड़ी मध्यम होती है। वक़्त के साथ-साथ सफ़ेद बौने ठन्डे पड़ते जाते हैं और वैज्ञानिकों की सोच है के अरबों साल में अंत में जाकर वे बिना किसी रौशनी और गरमी वाले काले बौने बन जाते हैं। क्योंकि हमारा ब्रह्माण्ड केवल १३.७ अरब साल पुराना है इसलिए अभी इतना समय ही नहीं गुज़रा के कोई भी सफ़ेद बौना पूरी तरह ठंडा पड़कर काला बौना बन सके। इस वजह से आज तक खगोलशास्त्रियों को कभी भी कोई काला बौना नहीं मिला है।

चुकंदर


चुकंदर (बीटा वल्गैरिस) अमारैन्थ परिवार का एक पादप सदस्य है। इसे कई रूपों में, जिनमें अधिकतर लाल रंग की जड़ से प्राप्त सब्जी रूप में प्रयोगनीय उत्पाद के लिये उगाया जाता है। इसके अलावा अन्य उत्पादों में इसके पत्तों को शाक रूप में प्रयोग करते हैं, व इसे शर्करा-स्रोत रूप में भी प्रयोग किया जाता है। पशु-आहार के लिये भी कहीं-कहीं प्रयोग किया जाता है। इसकी अधिकतर प्रचलित Beta vulgaris उपजाति vulgaris में आती है। जबकि Beta vulgaris उपजाति:maritima, जो ई-बीट नाम से प्रचलित है, इसी का जंगली पूर्वज है और भूमध्य सागरीय क्षेत्र, यूरोप की अंध-महासागर तटरेखा एवं भारत में उगती है। एक अन्य जंगली प्रजाति Beta vulgaris उपजाति:adanensis, यूनान से सीरिया पर्यन्त पायी जाती है।
Beta vulgaris, नाम से प्रचलित चुकंदर, शाक विक्रेता के यहां
चुकंदर में अच्छी मात्रा में लौह, विटामिन और खनिज होते हैं जो रक्तवर्धन और शोधन के काम में सहायक होते हैं। इसमें पाए जाने वालेएंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। यह प्राकृतिक शर्करा का स्त्रोत होता है। इसमें सोडियम, पोटेशियम,फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते हैं। चुकंदर में गुर्दे और पित्ताशय को साफ करने के प्राकृतिक गुण हैं।इसमें उपस्थित पोटेशियम शरीर को प्रतिदिन पोषण प्रदान करने में मदद करता है तो वहीं क्लोरीन गुर्दों के शोधन में मदद करता है। यह पाचन संबंधी समस्याओं जैसे वमन, दस्त, चक्कर आदि में लाभदायक होता है। चुकंदर का रस पीने से रक्ताल्पता दूर हो जाती है क्योंकि इसमें लौह भी प्रचुर मात्र में पाया जाता है। चुकंदर का रस हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर रखता है। विशेषतया महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी है। चुकंदर में बेटेन नामक तत्व पाया जाता है जिसकी आंत व पेट को साफ करने के लिए शरीर को आवश्यकता होती है और चुकंदर में उपस्थित यह तत्व उसकी आपूर्ति करता है। कई शोधों के अनुसार चुकंदर कैंसर में भी लाभदायक होता है। चुकंदर और उसके पत्ते फोलेट का अच्छा स्त्रोत होते हैं, जो उच्च रक्तचाप और अल्जाइमर की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।

उल्लू और भूतों के सरदार का सपना


जंगल में एक पुराना बरगद था। इस बरगद पर चिल्लू उल्लू का घर था। पेड़ के नीचे झनकू हाथी रहता था। दोनों के बीच इसी कारण से अच्छी दोस्ती हो गई थी। झनकू दिनभर जंगल में उधम करता। गन्ने खाता और सूँड भर-भर नहाता। चिल्लू भी दिनभर सोता। रात को जब झनकू हाथी पेड़ के नीचे लौटता तो इन दोनों दोस्तों के बीच अच्छी बातचीत होती।



एक शाम झनकू हाथी घूमता-घामता आ रहा था कि एक जगह उसे कुछ भूत गपशप करते हुए दिखाई दिए। वे लोगों को डराने के लिए डरावनी योजनाएँ बना रहे थे। तभी भूतों के सरदार की नजर झनकू हाथी पर पड़ी। वह चिल्लाया- वह रहा..! वह रहा..! पकड़ो उसे।

कुछ भूत झनकू को पकड़ने दौड़े और कुछ ने पूछा- यह कौन है सरदार?

सरदार बोला- गई रात मैंने एक सपना देखा कि मैंने एक हाथी को पूरा खा लिया। यह हाथी बिलकुल मेरे सपने के हाथी से मिलता-जुलता है। आज मुझे यकीन हो गया कि सपने सच्चे होते हैं और आज मैं अपने सपने की बात को पूरा करूँगा।


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भूतों ने हाथी को पकड़ लिया। झनकू हाथी का पाला भूतों से पहली बार पड़ा था इसलिए वह बहुत डर गया और कुछ नहीं कह पाया। हाथी ने जब देखा कि भूतों का सरदार और उसकी पत्नी उसे खाने के लिए उसकी तरफ आ रहे हैं तो उसके हाथ-पैर धूजने लगे।

तभी हाथी का मित्र चिल्लू चिल्लाता हुआ आ पहुँचा- यही है... यही है...। अरे बिलकुल यही है...और आकर अपने मित्र हाथी के सिर पर बैठ गया। चिल्लू की चेतावनी सुनकर भूतों का सरदार ठिठक गया। सरदार ने पूछा - अरे, उल्लू तुम किसके बारे में कह रहे हो और क्या कहना चाहते हो?

उल्लू बोला - मैं भूतों की रानी के बारे में कह रहा हूँ। कल रात मैंने सपने में देखा ‍कि एक भूतों की रानी से मेरी शादी हो गई और आपकी यह रानी मेरे सपनों की रानी से बिल्कुल मिलती-जुलती है, इसलिए अब मैं इससे विवाह करके अपने सपने को पूरा करूँगा।

भूतों की रानी ने जैसे ही यह सुना - वह जोर से चिल्लाई, मैं किसी उल्लू से शादी नहीं करूँगी। भूतों का सरदार - घबराओ मत। रानी यह तो उल्लू है और उल्लूओं जैसी बात करता है। सपने भी कहीं सच होते हैं। देखो मैंने सपने में देखा था कि मैंने एक हाथी को खा लिया था, पर अब मैं इसे जाने दे रहा हूँ।

इतना सुनना था कि झनकू हाथी भाग निकला और फिर चिल्लू ने भूतों के सरदार से कहा कि - 'चलो, तुम्हारा सपना सच नहीं है, इसका मतलब कि मेरा भी सपना सच नहीं है। ऐसे सपने को भूल जाना ही अच्‍छा है। सरदार - तुम दिखते उल्लू हो पर बातें तो समझदारी की करते हो।

उल्लू - ठीक है तो मैं चलता हूँ।
बिल्लू उड़कर बरगद के नीचे पहुँचा। यहाँ पहुँचकर चिल्लू खूब हँसा। आखिर आज उन्होंने भूतों को बेवकूफ जो बना दिया था। हाथी ने जान बचाने के लिए अपने मित्र का शुक्रिया किया। इस पर चिल्लू बोला - मित्रता में शुक्रिया की जरूरत नहीं होती मेरे दोस्त। हाथी बोला - तुम मेरे सच्चे साथी हो। उल्लू इस पर मुस्कुराया भर।