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Monday, 5 March 2012

पाकिस्तान के न्यूज़ एंकर जावेद चौधेरी की बेबाकी



पत्रकारों के लिए पाकिस्तान खतरनाक जगह है. यहाँ बेबाकी से पत्रकारिता करना बेहद कठिन काम है. रिपोर्टर्स विदआउट बॉडर्स के अनुसार पाकिस्तान में पिछले साल कुल 10 पत्रकार मारे गए. इसी संस्था की रिपोर्ट में पाकिस्तान के दक्षिण बलूचिस्तान इलाके के खुजदार जिले को 10 सबसे ज्यादा खतरनाक स्थानों में से एक माना गया है.
लेकिन इतने खतरनाक हालात के बावजूद पाकिस्तान के कुछ ऐसे पत्रकार हैं जिनके अंदर पत्रकारिता का जज्बा अब भी जिंदा है. यह जज्बा हाल ही एक लाईव कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर पूरे पाकिस्तान ने देखा. पाकिस्तान के मशहूर टीवी एंकर जावेद चौधेरी ने टीवी पर पाकिस्तानी हुक्मरानों को जमकर खरी - खोटी सुनाई और पाकिस्तानी हुक्मरानों को भिखारी तक कह डाला.
दरअसल पिछले साल नाटो हमले में मारे गए सैनिकों की मौत से टीवी एंकर जावेद चौधेरी खफा थे और इसके लिए पाकिस्तानी नेताओं को जिम्मेदार मानते हुए उन्होंने टीवी पर लाइव ही सारी कसर निकाल दी. साथ ही भारत से सीख लेने की सलाह तक दे डाली. जावेद की बेबाकी की आप भी इस वीडियो में देखें.



 

Saturday, 3 March 2012

लेज़र के 50 वर्ष, खोज और सफर





लाल रंग की रोशनी जो फैलती नहीं और सीधी निकल जाती है. लेज़र किरणों के बिना आज जीवन की कल्पना करना ही मुश्किल है. हमें भले ही इसका अहसास ना हो परंतु हमारे रोजमर्रा के जीवन में हम कई बार लेज़र किरण तकनीक का तथा उस तकनीक से बनी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, कभी जाने में कभी अनजाने में. 

सुपरमार्केट के कैशियर के बारकोड रीडर से लेकर सैन्य प्रतिष्ठानों के जटील हथियारों तक लेज़र तकनीक का इस्तेमाल होता है और यही इसकी विशेषता भी है. अपने जन्म के 50 वर्षों में लेज़र ने अपनी उपयोगिता को साबित कर दिया है. 

लेजर किरण की खोज करने वाले छायाकार थिओडोर माइमैन के लिए यह एक सयोंग ही था. माइमैन के कैमरे के लैंस के कोइल के ऊपर रूबी का एक टुकड़ा रखने पर एक लाल रंग की रोशनी निकली. थिओडोर ने ह्यूज़स रिसर्च लैबोरेटरी में इस पर और अध्ययन किया. उन्होनें दिखाया कि किसी बल्ब के फ्लैश से रूबी के पतले सरिए को चार्ज किया जा सकता है और ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है. इससे लाल रंग की शुद्ध रोशनी निकलती है जिसकी तरंगे एक समान रूप और अंतराल से प्रवाहित होती हैं और एक सीधी रेखा में चलती है. 

चुँकि ये किरणें अत्यंत शक्तिशाली थी और रेजर ब्लेड में भी छेद बना सकती थी इसलिए भौतिकशाष्त्रियों ने इसकी ताकत को जीलेट में मापना शुरू किया. 

लेज़र के आविष्कार के तुरंत बाद से ही उद्योगपतियों से लेकर सैन्य प्रतिष्ठानों की रूचि इस क्षैत्र में बढ गई. यहाँ तक कि कॉमिकों के खलनायक भी अब लेज़र बंदूको का इस्तेमाल करने लगे. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों में होड़ से मच गई कि इस तकनीक का इस्तेमाल कहाँ कहाँ और किस तरह से हो सकता है. 

1969 में एमेट लीथ और ज्यूरीस उपानिक्स ने लेज़र तकनीक की सहायता से त्रिआयामी होलोग्राफिक चित्र बनाया. इसके लिए दो अलग अलग शक्ति की लेजर किरणों का इस्तेमाल किया गया था. इससे तैयार चित्र अधिक सटीक था और उसकी नकली प्रतिकृति बनाना लगभग असम्भव था. 

इसके अलावा अन्य कई यंत्रों, मशीनों, गैजेटों को बनाने में लेजर तकनीक का इस्तेमाल होने लग गया. आज शायद ही कोई ऐसा क्षैत्र हो जहाँ लेजर तकनीक का इस्तेमाल ना होता हो. 

खेलकूद की बात करें तो स्केटिंग जैसे खेल में खिलाड़ी फर्श पर मौजूद लेज़र बीम से दिशा निर्देश प्राप्त करते हैं. उद्योगों की बात करें तो लेजर किरणों की सहायता से छोटी छोटी मशीनों को सटीक आकार देना सम्भव हुआ है. इससे अत्यंत पतले ओप्टिकल फाइबर केबल बनाने में सफलता पाई गई है. चिकित्सा के क्षैत्र में लेज़र किरणों ने तो काफी मदद की है. 1962 में लेज़र की सहायता से पहली नैत्र शल्य क्रिया की गई थी. और अब पथरी से लेकर कैंसर तक के रोगों के इलाज में इसकी सहायता ली जाती है. 




सैन्य गतिविधियों में भी लेजर किरणों का इस्तेमाल होता है, चाहे वह लेजर गाइडेड बम हो या बारूदी सुरंगों की पहचान करने वाले यंत्र. अंतरिक्ष अनुसंधान में भी इस तकनीक का इस्तेमाल होता है और मनोरंजन के क्षैत्र में भी. आज किसी भी खेल तथा अन्य आयोजन के उद्घाटन समारोह में लेजर शो का आयोजन आम बात है. 

कहने का अर्थ यह कि लेज़र तकनीक एक ऐसी तकनीक के रूप में विकसित हुई है जिसके बिना अब जीवन की कल्पना लगभग असम्भव है. परंतु अब यह हमारे जीवन से इस तरह से जुड़ गई है कि हमें इसके महत्व का अहसास ही नहीं होता.

अपना कंप्यूटर वाइरस कैसे बनाएं (Make Your Own Computer Virus)

क्या आप खुद का कंप्यूटर वाइरस बनाना चाहते हैं! क्या आप अपने दोस्तों के कंप्यूटर के साथ कोई शरारत करना चाहते हैं अगर हाँ तो इस लेख को पढ़िए! 

1 ) आपको सबसे पहले नोटपेड खोलना होगा और उसमे लिखना है 
@echo off 
अब इसके नीचे लिखे echo hello world ! आप hello world की जगह अपने मन का कोई भी 
मेसेज लिख सकते हैं! 
अब नोटपेड को किसी भी नाम से सेव कर दें लेकिन जिस नाम से भी सेव करें उसके आगे" .bat " 
जरूर लिखे!
अब जब कोई इस सेव की हुई फ़ाइल को cmd की विंडो में इस फ़ाइल का नाम लिखकर खोलेगा 
तो cmd विंडो के अन्दर वो सारा मेसेज आ जाएगा जो आपने नोटपेड में लिखा था!


2 ) अब अगर आपको किसी के कंप्यूटर का टाइम खराब है तो उसके लिए भी नोटपेड में काम करें!
सबसे पहले नोटपेड में लिखे @echo off 
इसके नीचे लिखे time 00 :00 अब इस फ़ाइल को भी सेव कर दें और फ़ाइल के नाम के आगे
".bat " जरुर लगायें! 
अब जैसे कोई कंप्यूटर में इस फ़ाइल को खोलेगा वैसे ही उसके कंप्यूटर का टाइम 12 घंटे पीछे 
हो जाएगा!


3 ) अब अगर आपको किसी के कंप्यूटर में कोई फोल्डर बनाना है तो उसके लिए नोटपेड में यह काम 
करें!
सबसे पहले नोटपेड में लिखे @echo off 
इसके नीचे लिखे MD folder name और इस फ़ाइल को सेव कर दें! फ़ाइल के नाम के आगे 
".bat" लगायें! आप folder name की जगह कोई भी नाम लिख सकते हैं!
अब जब भी की इस फ़ाइल को खोलेगा तो एक फोल्डर बन जाएगा! 


Source: 
http://hi.shvoong.com