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Saturday, 3 March 2012

क्या आपको अपनी साईट/ ब्लॉग की रैंकिंग पता है.


क्या आप जानते हैं कि 'अलेक्सा' पर जाकर आप अपने ब्लॉग या अपनी वेब साईट के बारे में यह जान सकते हैं कि इसकी ट्रैफिक वर्ल्ड रैंकिंग क्या है. तरीका बिल्कुल सीधा-सादा है.

इस साईट पर जाइये - http://www.alexa.com , पेज के दायीं ओर "साईट इन्फो" के नीचे बने स्थान पर अपनी साईट/ ब्लॉग का पूरा पता टाइप करें (जैसे : -http://sahibaat.blogspot.com ) , बस. कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई इ-मेल बाज़ी नहीं, हाथ के हाथ रिजल्ट. कुछ ही सेकेण्ड में आपके सामने होगी आपके साईट/ ब्लॉग की वर्ल्ड रैंकिंग. ग्राफ के माध्यम से रीच, ट्रैफिक और पेज-व्यू का विस्तृत लेखा जोखा तो यह साईट देती ही है. आपको यह भी बताती है कि आपकी अपनी साईट/ ब्लॉग कितने पानी में हैं.

वेब दुनिया की अधिकाँश विज्ञापन दाता कंपनियां अलेक्सा के परिणामों को तरजीह देती हैं.

Friday, 2 March 2012

सुपरनोवा विस्फोट



केंकड़ा नॅब्युला - यह एक महानोवा विस्फोट का बचा हुआ बादल है
हम से २१,००० प्रकाश-वर्ष दूर डब्ल्यू॰आर॰ १२४ नाम के वुल्फ़-राये श्रेणी के तारे के इर्द-गिर्द महानोवा अवशेष का नॅब्युला
खगोलशास्त्र में महानोवा (सुपरनोवा) किसी तारे के भयंकर विस्फोट को कहते हैं। महानोवा नोवा से अधिक बड़ा धमाका होता है और इस से निकलता प्रकाश और विकिरण (रेडीएशन) इतना ज़ोरदार होता है के कुछ समय के लिए अपने आगे पूरी आकाशगंगा को भी धुंधला कर देता है लेकिन फिर धीरे-धीरे ख़ुद धुंधला जाता है। जब तक महानोवा अपनी चरमसीमा पर होता है, वह कभी-कभी कुछ ही हफ़्तों या महीनो में इतनी उर्जा प्रसारित कर सकता है जितनी की हमारा सूरज अपने अरबों साल के जीवनकाल में करेगा।
महानोवा के धमाके में सितारा अपने अधिकाँश भाग को ३०,००० किमी प्रति सैकिंड (यानि प्रकाश की गति का १०%) तक की रफ़्तार से व्योम में फेंकता है, जो अंतरतारकीय माध्यम (इन्टरस्टॅलर स्पेस) में एक आक्रमक झटके की तरंग बन के फैलती है। इसके नतीजे से जो फैलता हुआ गैस और खगोलीय धूल का बादल बनता है उसे "महानोवा अवशेष" कहते हैं।


नाम का इतिहास

"महानोवा" को अंग्रेज़ी में "supernova" (सुपरनोवा) लिखा जाता है। १६वी सदी के वैज्ञानिक टैको ब्राहे ने एक महानोवा को देखा था, जिसका नाम आगे चलकर "ऍस॰ऍन॰ १५७२" रखा गया। उन्होंने इसे अपनी किताब में लातीनी भाषा में "दे स्तेल्ला नोवा" (de stella nova) बुलाया जिसका मतलब है "नए तारे के बारे में" जिस से "नोवा" नाम बैठ गया, हालाँकि इसका अर्थ लातीनी में सिर्फ "नव" या "नया" था। १९३० तक बड़े विस्फोटों को "महानोवा" (सुपरनोवा) और छोटे विस्फोटों को "नोवा" बुलाया जाता था, लेकिन कभी-कभी एक ही चीज़ के लिए दोनों नाम प्रयोग कर लिए जाते थे।

नोवा विस्फोट



अपने साथी से हाइड्रोजन खींचता हुआ एक सफ़ेद बौना तारा - यही हाइड्रोजन आगे चलकर एक नोवा विस्फोट करेगा (काल्पनिक चित्रण)
सन् २००९ में स्रोतास्विनी तारामंडल में देखा गया ऍरिडानी नोवा
नोवा किसी सफ़ेद बौने तारे की सतह पर हाइड्रोजन एकत्रित होने के बाद उसमें एक भयंकर परमाणु विस्फोट को कहते हैं जिसमें अनियंत्रित रफ़्तार से नाभिकीय संलयन (न्यूक्लियर फ्यूज़न) होता है।हांलांकि इसका नाम महानोवा से मिलता-जुलता है, इन दोनों में कोई सम्बन्ध नहीं।

प्रक्रिया

अगर किसी सफ़ेद बौने तारे का कोई नज़दीकी साथी तारा हो तो कभी-कभी उस से सफ़ेद बौना हाइड्रोजन और हीलियम खींच कर अपने वायुमंडल में एकत्रित करने लगता है। यह साथी तारा या तो कोईमुख्य अनुक्रम तारा हो सकता है या कोई बूढ़ा होता तारा हो सकता है जो फूलकर लाल दानव तारा बनाने लगा है। जब काफ़ी मात्रा में हाइड्रोजन इकठ्ठी हो जाती है जो धमाकेदार तरीक़े से कुचली जाती है और उसके नाभिकीय संलयन से बहुत प्रकाश और ऊर्जा पैदा होती है। इस से तारे की चमक (निरपेक्ष कान्तिमान) बढ़ जाती है। यह नोवा विस्फोट कितनी तेज़ी से चल रहा है इसका अनुमान इस बात से लगाया जाता है कि तारे की यह बरही हुई चमक किस गति से कम होती है। इस चमक को खगोलीय मैग्निट्यूड में मापा जाता है, जो एक विपरीत माप है: किसी वस्तु का मैग्निट्यूड जितना कम हो वह वस्तु उतनी ही अधिक रोशन होती है। अगर नोवा धीमी गति से चल रहा है तो उस तारे के मैग्निट्यूड में २ अंकों का अंतर पड़ने में ८० दिन से भी अधिक सकते हैं और अगर तेज़ी से चल रहा है तो २५ दिनों के अन्दर भी ऐसा हो सकता है।

नोवा की श्रेणियाँ

नोवओं को उनकी चमक में बदलाव की गति के अनुसार श्रेणियाँ दी जाती हैं:
  • ऍन॰ए॰ (NA) - तीव्र नोवा; इन नोवाओं में तीव्रता से रोशनी बढ़ती है और फिर ३ मैग्निट्यूडों से १०० दिनों के अन्दर घट जाती है।
  • ऍन॰बी॰ (NB) - धीमे नोवा; इन नोवाओं में रोशनी बढ़ती है और फिर ३ मैग्निट्यूड घटने के लिए १५० से अधिक दिन लेती है।
  • ऍन॰सी॰ (NC) - बहुत धीमे नोवा; इन नोवाओं में रोशनी बढ़ती है और फिर १० साल या उस से भी अधिक उसी स्तर पर टिकी रहती है। संभव है कि ऐसे नोवा अन्य नोवाओं से काफ़ी भिन्न हों, मसलन यह ग्रहीय नीहारिकाओं के सृजन कि वजह से भी हो सकते हैं।
  • ऍन॰आर॰ या आर॰ऍन॰ (NR/RN) - आवर्ती नोवा, जो बार-बार फटते हैं। अक्सर इनके विस्फोटों के बीच में १८ से २० वर्षों का फ़ासला होता है।